
गृह मंत्री अमित शाह ने किया रिटायरमेंट प्लान का खुलासा
नई दिल्ली/अहमदाबाद: भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने अपने राजनीतिक जीवन के बाद की योजनाओं का खुलासा करते हुए कहा है कि वे सेवानिवृत्ति के बाद अपना जीवन वेदों, उपनिषदों के अध्ययन और प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को समर्पित करेंगे। यह बयान उन्होंने अहमदाबाद में आयोजित “सहकार संवाद” कार्यक्रम के दौरान दिया।
“मैंने निश्चय किया है कि रिटायरमेंट के बाद मैं किसी राजनीतिक कार्य में नहीं जाऊंगा। मैं वेद, उपनिषद पढ़ूंगा और प्राकृतिक खेती करूंगा।” – अमित शाह
📚 धर्म और दर्शन की ओर वापसी
राजनीति के रणभूमि से सीधे भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा की ओर रुख करते हुए शाह ने कहा कि उनका सपना है कि वे जीवन के अंतिम पड़ाव में आध्यात्मिक साधना और अध्ययन करें। उन्होंने कहा कि वे वेदों, उपनिषदों और शास्त्रों का गहराई से अध्ययन करेंगे और इस ज्ञान को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे।
यह घोषणा भारतीय राजनीति में एक अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है जहाँ एक शीर्ष नेता राजनीति से निवृत्त होकर भारतीय दर्शन में रमने की बात करता है।
🌱 प्राकृतिक खेती की ओर झुकाव
अमित शाह ने बताया कि उन्होंने पहले से ही अपने फार्महाउस पर प्राकृतिक खेती के प्रयोग शुरु कर दिए हैं, और इसके परिणाम प्रभावशाली रहे हैं। उनके अनुसार:
- जैविक खेती से गेहूं की उपज 1.5 गुना बढ़ी है।
- खेती में रासायनिक उर्वरकों के बिना उत्पादन न केवल संभव है, बल्कि स्वास्थ्यवर्धक और टिकाऊ भी है।
- रासायनिक खेती की तुलना में, प्राकृतिक खेती में मिट्टी का जल-धारण क्षमता, सूक्ष्मजीव जीवन और कृषि लागत में कमी जैसे अनेक फायदे हैं।
“रासायनिक खेती ने मानव स्वास्थ्य को बर्बाद कर दिया है। बीपी, शुगर, थायरॉइड जैसी बीमारियों का कारण रसायनों से भरी फसलें हैं।” – शाह
🧩 सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण बदलाव
यह कार्यक्रम केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की पहल पर आयोजित किया गया था। शाह ने बताया कि मंत्रालय का उद्देश्य प्रत्येक गांव में एक सहकारी संस्था बनाना है ताकि ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से सशक्त किया जा सके।
उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2026 तक:
- 2 लाख नई PACS (प्राथमिक कृषि साख समितियाँ) स्थापित की जाएंगी।
- सहकारी शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए एक राष्ट्रीय यूनिवर्सिटी की भी योजना है।
- मत्स्य पालन, दुग्ध उत्पादन, और जैविक कृषि में सहकारी मॉडल को बढ़ावा मिलेगा।
🗣️ राजनीति से परे सोच
अमित शाह का यह निर्णय राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। वे 2024 के लोकसभा चुनाव में फिर से निर्वाचित हुए थे, लेकिन अब उन्होंने संकेत दिए हैं कि वे 2029 के बाद राजनीति छोड़ सकते हैं।
राजनीति, धर्म और कृषि — तीनों क्षेत्रों को साथ जोड़ने वाली यह योजना भारत के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकती है। जहाँ एक ओर यह जीवन मूल्यों की ओर लौटने का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर कृषि क्षेत्र में नवाचार और पर्यावरण के लिए चिंता भी दर्शाती है।
📌 मुख्य बिंदु संक्षेप में:
- वेद-उपनिषदों का अध्ययन रिटायरमेंट के बाद अमित शाह का मुख्य कार्य रहेगा,ऐसे उन्होने बताया है l
- प्राकृतिक खेती के प्रयोग से 1.5 गुना उत्पादन की जानकारी
- रासायनिक खेती से स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों पर चिंता
- 2026 तक दो लाख नई सहकारी समितियों की स्थापना का लक्ष्य
- गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सहकारिता मंत्रालय की योजना